America ने Crypto पर चला सबसे बड़ा दांव, Bitcoin में ट्रेड करने की मंजूरी मिली | TechNews590

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          क्रिप्टो करेंसी की दुनिया उजड़ ही गयी थी, लेकिन अब एक कानून इसमें फिर से जान फूंक सकता है। बात अमेरिका की है, जहाँ पर कैपिटल मार्केट रेग्युलेटर सेक्युरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज कमिशन यानी एससीसी ने कर दिया है। एक बड़ा ऐलान एसीसी ने क्रिप्टो में ट्रेनिंग को कानूनी अमलीजामा पहनाने की दिशा में इतना बड़ा कदम उठाया है कि इसका असर पूरी दुनिया में होने की बात कही जाने लगी है। दरअसल, ऐसी सी ने पहले लिस्टेड ईटीएफ को हरी झंडी दिखा दी है।


इस ईटीएफ में बिटकॉइन को ट्रैक किया जाएगा। यानी इस के जरिये इन्वेस्टर्स बिटकॉइन में ट्रेड भी कर पाएंगे और इसकी कीमतों में होने वाले उतार चढ़ाव का फायदा भी ले सकेंगे। एक रिपोर्ट की मानें तो यूएस सिक्योरिटीज़ ऐंड एक्सचेंज कमिशन ने ब्लैक रॉक आरके इन्वेस्टमेंट्स बी 21 शेर, फिडेलिटी इन्वेस्ट को ओर्गेनिक समेत 11 ऐप्लिकेशंस को मंजूरी दे दी है। यूएस सिक्योरिटीज़ द्वारा इन आवेदनों को मंजूरी मिलने के बाद कुछ एटीएस ने गुरुवार से ही कारोबार करना शुरू कर दिया है।


बिटकॉइन ने पिछले छे महीनों में निवेशकों को कितना रिटर्न दिया? चलिए अब उस पर नजर डालते हैं। इसमें बीते छे महीनों में निवेशकों को 56.62% का रिटर्न दिया। वहीं पिछले एक महीने में इन्वेस्टर्स ने इससे 16.34 फीसदी का रिटर्न हासिल किया है। अब अमेरिका के इस कदम से भारत में भी क्रिप्टो करेंसी की ट्रेनिंग करने वालों में और क्रिप्टो एक्सचेंज चलाने वालों में उम्मीद पैदा हो गई। हालांकि ये उम्मीद ज्यादा वक्त तक टिक नहीं पाएगी क्योंकि भारत में बैंको और करंसी के रेग्युलेशन के लिए जिम्मेदार रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने तुरंत साफ कर दिया की की भारत में ट्रेनिंग को कानूनी रूप से इजाजत देने की फिलहाल उनकी कोई इच्छा नहीं है।


उन्होंने अमेरिकी ऐसी सी के फैसले पर बोल दिया की दुनिया के किसी देश में किया गया कोई फैसला भारत के लिए भी सही हो की ये जरूरी नहीं है। इस तरह से क्रिप्टो वालों की उम्मीद जग ते ही फिर से ठंडी हो गई। क्रिप्टो करंसी का बाजार बीते डेढ़ 2 साल में पूरी दुनिया में पड़ा हुआ था। दुनिया भर में रेग्युलेटर्स और सरकार इसे कानूनी रूप से इजाजत देने को तैयार नहीं है।


पर कैसे लगाम लगाई जाए, इसे लेकर दुनियाभर में बहस होती रही है। भारत में क्रिप्टो को लेकर सरकार और रिज़र्व बैंक आमने सामने नजर आए हैं। रिज़र्व बैंक का साफ तौर पर मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी तरीके से इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। वहीं सरकार और वित्तमंत्री का रुख इस तरह का रहा है कि देश में क्रिप्टो ट्रेनिंग को कुछ कानूनों के साथ चलने देने की इजाजत मिलनी चाहिए। का इस्तेमाल कई तरह की आतंकी और दूसरे आपराधिक गतिविधियों में होने की वजह से इसे लेकर एक मजबूत रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की भी बात ज़ोर शोर से चलती रही है।


करीब सालभर पहले सरकार ने क्रिप्टो ट्रेनिंग पर इतने ऊंचे टैक्स लगा दिए थे कि लोगों के लिए इसमें मुनाफा कमाना तकरीबन नामुमकिन हो गया। देश के कई क्रिप्टो एक्सचेंज को भी भारत से अपना कारोबार समेट कर दूसरे देशों का रुख करना पड़ा। अब अमेरिकी रेग्युलेटर के वैलिड रूप देने की दिशा में इस बड़े कदम का असर ना सिर्फ भारत पर पड़ सकता है बल्कि दुनिया के दूसरे रेग्यूलेटर्स भी इस तरह के प्रोविशन कर सकते हैं। लेकिन भारत में सबसे बड़ी मुश्किल आरबीआई की ओर से है।


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