प्रधानमंत्री को 'अयोध्या दर्शन' सौंपेगा गीताप्रेस
श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला के विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री समेत विशिष्ट अतिथियों को गीताप्रेस से प्रकाशित पुस्तकें प्रसाद के साथ भेंट की जाएंगी। इसमें 'अयोध्या दर्शन', 'अयोध्या माहात्म्य', 1972 में प्रकाशित कल्याण का विशेष अंक 'श्रीरामांक' व 'गीता दैनंदिनी' (डायरी) शामिल होगी।
समारोह में शामिल प्रत्येक श्रद्धालु को प्रसाद के साथ 'अयोध्या दर्शन' पुस्तक भेंट की जाएगी। इसके लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने सहमति प्रदान कर दी है। उन्होंने 15 जनवरी तक पुस्तकें उपलब्ध कराने को कहा है।
गीताप्रेस ने आठ हजार श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ 'अयोध्या दर्शन' पुस्तक भेंट करने का निर्णय लिया है। यद्यपि, गीताप्रेस इस पुस्तक की 10 हजार प्रतियां प्रकाशित कर रहा है। जरूरत पड़ी तो शेष दो हजार प्रतियां भी वहां भेज दी जाएंगी। 'श्रीरामांक' की तीन हजार प्रतियां प्रकाशित की जा रही हैं। यह 1972 में छपे कल्याण के विशेषांक का परिवर्धित संस्करण होगा।
इसमें उस साल के फरवरी व मार्च के साधारण अंकों में छपे सभी लेख व सूर्य वंशावली भी शामिल की जाएगी, जो पुराने विशेषांक में नहीं थी। इसके अलावा 976 पेज के इस ग्रंथ में 48 पेज भगवान से जुड़े चित्रों को दिए जाएंगे। सभी चित्र आर्ट पेपर पर प्रकाशित होंगे, जिन्हें बाद में पुस्तक में जोड़ा जाएगा।
विशिष्ट अतिथियों के लिए 'श्रीरामांक', 'अयोध्या दर्शन', 'अयोध्या माहात्म्य' व 'गीता दैनंदिनी' के 50 गुच्छ के लिए जन्मभूमि न्यास ने कहा है, लेकिन गीताप्रेस 100 गुच्छ तैयार कर रहा है।
श्रीराम जन्मभूमि से मिला आमंत्रण
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए गीताप्रेस को भी आमंत्रण पत्र प्राप्त हुआ है। ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल के नाम से पत्र आया है। वह समारोह में अपनी आंखों से रामलला के विग्रह का उद्घाटन देखेंगे।
'श्रीरामांक' की कपोजिंग शुरू हो गई • है। एक-दो दिन क में छपाई शुरू करा दी जाएगी। इसे एक स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। साथ ही अयोध्या दर्शन की 10 हजार प्रतियां प्रकाशित की जा रही हैं।
- देवी दयाल अग्रवाल, ट्रस्टी, गीताप्रेस
● 'अयोध्या दर्शन' व 'श्रीरामांक' के अलावा हमारे
पास अन्य पुस्तकें पर्याप्त संख्या में हैं। विशिष्ट अतिथियों के लिए पुस्तकें अलग कर दी गई हैं।' 'श्रीरामांक' छपने के बाद गुच्छ तैयार कर श्रीराम जन्मभूमि को भेज दिया जाएगा।
