निर्णय इलाहाबाद हाई कोर्ट में कमीशन की अजी स्वीकार, 18 को तय होगी रूपरेखा
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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि, काशी में ज्ञानवापी के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान का भी सर्वे होना तय हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान, कटरा केशवदेव परिसर की सर्वे रिपोर्ट के लिए कमीशन जारी करने की अर्जी स्वीकार कर ली है। कमीशन की संरचना व रूपरेखा तय करने के लिए 18 दिसंबर की तारीख तय की गई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव व सात अन्य के सिविल वाद में दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। बता दें, अयोध्या में राम जन्मभूमि में सर्वे कराए जाने के फैसले ने मामले को निर्णयात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद की थी।
इधर, कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में
गुरुवार शाम प्रार्थना पत्र दिया। सुनवाई शुक्रवार को होगी। गुरुवार को कोर्ट ने मस्जिद पक्ष की यह मांग अस्वीकार कर दी कि सिविल वाद की पोषणीयता संबंधी अर्जी कमीशन जारी करने से पहले तय की जाए। कोर्ट ने कहा, कमीशन वाद की सुनवाई के किसी भी स्टेज पर जारी किया जा सकता है। ऐसा कोई स्ट्रेट जैकेट फार्मूला नहीं है कि कोर्ट किस अर्जी की पहले सुनवाई करे। कोई भी पक्ष कोर्ट को अपनी अर्जी पहले सुनने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कमीशन जारी करने की अर्जी पहले दाखिल की गई थी। सुनवाई व निस्तारण तिथि पर सिविल वाद की पोषणीयता पर कानूनी आपत्ति की गई। कमीशन जारी करने की अर्जी पर शाही मस्जिद ईदगाह की तरफ से आपत्ति दाखिल की गई है और वाद पोषणीयता अर्जी पर वादी पक्ष को आपत्ति दाखिल करने का समय दिया गया है। बिना विरोधी पक्ष को सुने कोई अर्जी तय नहीं की जा सकती।
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मंदिर पक्ष ने कहा-कमीशन से मिलेंगे साक्ष्य
वादी भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव के अधिवक्ता हरिशंकर जैन व विष्णु जैन ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्वामित्व के इतिहास व विवाद के ब्योरे संबंधी दस्तावेजी साक्ष्य के हवाले से कहा कि कटरा केशव देव के नाम दर्ज पूरी जमीन भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान है, जो 13.37 एकड़ में है। इसमें शाही मस्जिद ईदगाह स्थित है। कमीशन जारी होने से दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त होंगे। उन्होंने ज्ञानवापी विवाद में भी कमीशन जारी
होने का हवाला दिया और कहा कि परिसर के फोटोग्राफ व वीडियोग्राफी से साक्ष्य मिलेगा। इससे किसी को नुकसान नहीं है। मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता वजाहत हुसैन, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता का कहना था कि पहले वाद पोषणीयता की अर्जी तय की जाए क्योंकि क्योंकि सिविल वाद दाखिल करने पर प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट प्रतिबंध लगाता है। यदि वाद ही वादी के खिलाफ तय हो गया तो कमीशन का सवाल ही नहीं रहेगा।
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मस्जिद के स्तंभ पर हिंदू धार्मिक प्रतीक होने का दावा
मंदिर पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और प्रभाष पांडेय की तरफ से दाखिल अर्जी में दावा किया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान मस्जिद के नीचे है। ऐसे कई प्रतीक हैं जो स्थापित करते हैं कि मस्जिद हिंदू मंदिर है। कहा गया था कि वहां एक कमल के आकार का स्तंभ है, जो हिंदू मंदिरों की एक उत्कृष्ट विशेषता है और
शेषनाग की एक छवि भी मौजूद है, जो हिंदू देवताओं में एक हैं, उन्होंने भगवान कृष्ण की उनके जन्म की रात रक्षा की थी। यह भी कहा गया है कि मस्जिद के स्तंभ के आधार पर हिंदू धार्मिक प्रतीक और नक्काशी दिखाई देती है। इसलिए कोर्ट तीन अधिवक्ताओं का आयोग नियुक्त कर जांच का निर्देश दे। पूरी कार्यवाही की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाए।
हमारी अपील हाई कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। कमीशन में कितने सदस्य होंगे, यह किस तरह कार्य करेगा, इसे 18 दिसंबर को कोर्ट तय करेगा। यह जटिल केस है। इसमें एडवोकेट कमीशन जरूरी था।
निर्णय के बाद श्रीकृष्ण जन्म स्थान में एएसआइ सर्वे की उम्मीद बढ़ी
प्रयागराज : निर्णय के बाद एएसआइ सर्वे की
उम्मीद बढ़ गई है। कोर्ट कमीशन की रिपोर्ट के बाद यह मांग तेज होगी। जानकार कहते है कि कोर्ट कमीशन की रिपोर्ट पर एएसआइ सर्वे का भविष्य निर्भर करेगा।
यह है कोर्ट कमीशन
कोर्ट कमीशन में न्यायालय की ओर से नियुक्त अधिवक्ता, विवादित भूमि का वादी और प्रतिवादी की मौजूदगी में अवलोकन करते हैं। कितनी भूमि में क्या बना है, इसे देखते हैं और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करते हैं। कोर्ट आवश्यक निर्देश के साथ स्थलीय निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने का आदेश देकर कोर्ट कमिश्नर भेजता है। उसकी रिपोर्ट साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होती है। कोर्ट रिपोर्ट से असंतुष्ट होने पर आगे जांच करा सकता है। कमिश्नर के पास सिविल प्रक्रिया संहिता के वे सारे अधिकार हैं जो निरीक्षण कार्रवाई के लिए जरूरी हो।
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