Morgan Stanley और CLSA की भविष्यवाणी ! |
नमस्कार, आप देख रहे हैं technews590 भारतीय शेयर बाजार जीस तरह से तेजी का परांठा भरा है। उसे भले ही इन्वेस्टर्स में जश्न का माहौल है लेकिन बाजार पर नजर रखने वाला एक तबका ऐसा भी है जो बाजार की तेजी को लेकर अपनी फिक्र जतारा है। 1 दिन पहले यानी सोमवार 8 जनवरी को करीब एक फीसदी गिरने के बाद अगले ही दिन मंगलवार को बाजार ने सभी नेगेटिव ट्रेंड को नकार दिया और तेज परांठा भरा।
मंगलवार को 12:00 बजे सेंसेक्स 615 अंक चढ़कर 71,977 पर पहुँच गया, जबकि निफ्टी 188 अंक उछलकर 21,701 पर ट्रेंड कर रहा था। बाजार में बनी इसी तूफानी तेजी को लेकर अब ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने अपना फिक्र ज़ाहिर किया है। असल में ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली और सीएलएसए ने 2024 में इंडियन मार्केट्स को लेकर अपना सतर्कता भरा रुख ज़ाहिर किया है। इन दोनों ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि भारतीय बाजारों में तेज उतार चढ़ाव दिखाई दे सकता है।
ब्रोकरेज हाउस ने इसकी वजहें भी गिनाई हैं। इन्होंने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव अमेरिकी मार्केट के घटनाक्रम और ग्लोबल फैक्टर्स के साथ भारतीय बाजारों की ऊंची वैल्युएशन बाजार में उतार चढ़ाव पैदा कर सकते हैं। मॉर्गन स्टैनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हालांकि हालिया राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों से संकेत मिल रहा है कि बीजेपी की अगुवाई में एनडीए लोकसभा चुनाव 2024 में भी जीत हासिल करने में सफल होगा।
इसके बावजूद चुनावों के नतीजों के आने तक भारतीय बाजारों में उतार चढ़ाव जारी रहेगा।
भारतीय बाजारों पर अमेरिकी मार्केट से मिलने वाले संकेत भी असर डाल सकते हैं। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में फेडरल रिज़र्व का रेट कट पर फैसला भी भारतीय बाजारों में वोलैटिलिटी पैदा कर सकता है। ग्लोबल लेवल पर होने वाले घटनाक्रम, कच्चे तेल के दाम जैसे फैक्टर भी भारत पर असर डाल सकते हैं। मॉर्गन स्टैनली ने अपनी रिपोर्ट में हालांकि इन फैक्टर्स का भी जिक्र किया है जिनसे बाजार में उतार चढ़ाव पर लगाम लग सकती है।
ब्रोकरेज हाउसेज ने कहा है कि भारत के मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स अगले तीन से 4 साल में 20 फीसदी की कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ और फंड के लिए भरोसेमंद प्राइमरी मार्केट से भारतीय शेयर बाजारों में उतार चढ़ाव कम रह सकता है। ब्रोकरेज हाउस ने कहा है कि भले ही बीते वक्त के मुकाबले भारत पर कच्चे तेल का बुरा असर कम पड़ा है, लेकिन क्रूड की कीमतों में और तेजी बाजार के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है। अब बात करते है सीएलएसए की। सीएलएसए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय बाजारों ने 2024 की शुरुआत बेहद बुलंद रुक के साथ की है।
इसके साथ ही बाजार की वैल्यूएशन ऊंचे लेवल पर हैं और डैड रेकोर्ड डिस्काउंट पर है। सीएलएसए ने कहा है कि हालांकि भारत की लॉन्ग टर्म रोड स्टोरी शानदार है और पीएम मोदी के 30 रिटर्न की संभावनाएँ हैं, लेकिन ऊंचे लेवल पर साल की शुरुआत इस साल रिटर्न पर भारी पड़ सकती है। सीएलएसए ने कहा है कि हमारा मानना है कि शेर अमेरिका की एक पर्फेक्ट सॉफ्ट लैन्डिंग को समझ चूके हैं और ग्रोथ या महंगाई के मसले पर भारत की खराब खबर शहर को नुकसान पहुंचा सकती है।
भारतीय बाजारों ने 2023 में तगड़े रिटर्न दिए हैं। 2023 में निफ्टी करीब 20 फीसदी चढ़ा है, जबकि सेंसेक्स ने करीब 18 फीसदी रिटर्न दिया है। इतना ही नहीं बीएससी पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 300 66,00,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को पार कर गया। इतना ही नहीं 2023 का आखिरी महीना रिटर्न के लिहाज से सबसे बढ़िया साबित हुआ है। दिसंबर 2023 में निफ्टी सात फीसदी से अधिक चढ़ा है। पूरे साल में किसी एक महीने में निफ्टी में यह सबसे बड़ी तेजी रही हैं।
उसके बाद नवंबर का नंबर रहा है जबकि निफ्टी 5.5 फीसदी चढ़ा था। कुल मिलाकर शेयर बाजार को लेकर इन्वेस्टर जमकर बुलिश हैं और बाजार में खूब पैसा लगा रहे हैं। यहाँ तक कि म्यूचुअल फंड में भी तगड़ा पैसा आ रहा है। दिसंबर 2023 में म्यूचुअल फंड का एयूएम बढ़कर 50,00,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को पार कर गया। हालांकि अब मॉर्गन स्टैनली और सीएसी ने बाजार में उतार चढ़ाव को लेकर जो बोर्डिंग दी है उसे भी इन्वेस्टर्स को अपने दिमाग में रखना चाहिए।
देखने वाली बात यह होगी इन दोनों ब्रोकरेज हाउस इसकी बाजार में उतार चढ़ाव को लेकर भविष्यवाणी कितनी सच साबित होती है।
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