रूस को भारत के पश्चिमी और पूर्वी तट से जोड़ने की तैयारी, रुपये या रूबल या दोनों मुद्राओं में भुगतान पर भी हुई चर्चा

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वैश्विक व्यवस्था चाहे जैसी भी हो भारत और रूस आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में जुटे हुए हैं। इस लिहाज से बुधवार को मास्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच हुई बैठक बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाएगी। जयशंकर और लावरोव की वार्ता कारोबार और कनेक्टिविटी पर केंद्रित रही। इस बैठक में रूस को भारत के दो मार्गों (पश्चिमी तट और पूर्वी तट) से जोड़ने की योजना पर बात काफी आगे बढ़ी है। इतना ही नहीं, रूस ने कहा है कि वह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत आधुनिक हथियारों का उत्पादन करने के लिए तैयार है।


विदेश मंत्रियों की यह बैठक दोनों देशों के प्रमुखों (भारत के पीएम और रूस के राष्ट्रपति) के बीच होने वाली सालाना बैठक की जगह हुई है। पिछले दो वर्षों से यह शिखर बैठक नहीं हुई है, जिसके अगले वर्ष होने की संभावना विदेश मंत्री जयशंकर ने जताई है।


 बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में जयशंकर ने कहा, रूस एक रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ अंतरराष्ट्रीय हालात व मौजूदा परिस्थितियों पर बात हुई। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति, यूक्रेन विवाद, गाजा के हालात, शंघाई सहयोग संगठन, ब्रिक्स, जी-20 व संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों के बारे में बात हुई है। भारत व रूस इन चारों संगठनों के सदस्य हैं। जयशंकर ने आगे कहा, हमारे बीच आर्थिक सहयोग, ऊर्जा कारोबार, सैन्य सहयोग पर भी बात हुई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच 2024- 2028 एजेंडे पर हस्ताक्षर हुए हैं। भारत व रूस के विशेष रणनीतिक रिश्ते को बहुत ही ठोस व स्थिर बताते हुए जयशंकर ने कहा, इस वर्ष यह हमारे बीच सातवीं बैठक है।


जयशंकर ने कहा, रूस के साथ दो संपर्क मार्ग स्थापित करने की योजना है। एक मार्ग भारत के पश्चिमी तट से होगा जो इंटरनेशनल नार्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कारिडोर को जोड़ेगा। यह भारत को ईरान, अजरबैजान होते हुए रूस से जोड़ेगा।


दूसरा मार्ग भारत के पूर्वी तट (चेन्नई) से सुदूर पूर्वी रूस में स्थित व्लादिवोस्तोक बंदरगाह का होगा। इस मार्ग को भारत यूरोप से भी जोड़ने की इच्छा रखता है। सर्गेई लावरोव ने कहा, दोनों नेताओं ने रूस-भारत के बीच आधुनिक हथियारों के संयुक्त उत्पादन सहित सैन्य, तकनीकी सहयोग के दृष्टिकोण पर चर्चा की।


 इस मुद्दे पर ठोस प्रगति हुई है। भारत व रूस के बीच स्थानीय मुद्रा में कारोबार करने की संभावना पर भी बात हुई है। इस बारे में लावरोव ने जानकारी दी।


बताया गया है कि दोनों देश भारतीय रुपये, रूस की मुद्रा रूबल या दोनों मुद्राओं में आयात- निर्यात का सेटलमेंट करने को लेकर बात कर रहे हैं। इस बारे में विदेश मंत्री र जयशंकर ने एक दिन पहले रूस के कारोबार मंत्री से भी बात की थी।


सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन रूस ने बुधवार को कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की भारत की आकांक्षाओं का समर्थन करता है। रूस ने जी20 शिखर सम्मेलन में विवादास्पद मुद्दों से निपटने में भारत की सफलता को सराहा और इसे उसकी विदेश नीति की - सच्ची जीत करार दिया। सर्गेई लावरोव ने कहा, हम सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए भारत की - उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं।

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